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धान से नहीं मिली उतनी कमाई, गेंदा फूल की खेती ने बदल दी किसान की किस्मत

लैलूँगा । रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड के ग्राम कोड़केल के किसान आनंदराम सिदार ने अपनी मेहनत और नई सोच से खेती की तस्वीर बदल दी है। पारंपरिक धान खेती से सीमित आय पाने वाले आनंदराम ने जब गेंदा फूल की खेती शुरू की, तो कुछ ही समय में उनकी आमदनी कई गुना बढ़ गई। आज वे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं और उनकी सफलता यह बता रही है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक और नगदी फसलों की ओर बढ़ें, तो खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।

दरअसल, आनंदराम सिदार पहले हर वर्ष धान की खेती करते थे। लगभग 10 क्विंटल धान उत्पादन से उन्हें करीब 31 हजार रुपए की आमदनी होती थी, लेकिन बीज, खाद, मजदूरी और अन्य खर्च निकालने के बाद उनके हाथ में केवल 22 हजार रुपए का ही लाभ बच पाता था। लगातार बढ़ती लागत और कम मुनाफे के कारण वे बेहतर विकल्प की तलाश में थे।

इसी दौरान उद्यानिकी विभाग द्वारा राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत गेंदा क्षेत्र विस्तार योजना की जानकारी उन्हें मिली। विभाग के अधिकारियों ने उन्हें फूलों की खेती के लिए प्रेरित किया और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया। इसके बाद आनंदराम ने वर्ष 2025-26 में 0.400 हेक्टेयर भूमि में गेंदा फूल की खेती शुरू की। उद्यानिकी विभाग की ओर से उन्हें उन्नत गुणवत्ता वाले बीज, उर्वरक प्रबंधन और आधुनिक खेती तकनीकों की जानकारी दी गई।

आनंदराम ने वैज्ञानिक पद्धति से खेती करते हुए खेत की नियमित देखभाल की। समय पर सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन और रोग नियंत्रण के कारण उनकी फसल बेहतर हुई। परिणामस्वरूप उन्होंने लगभग 44 क्विंटल गेंदा फूल का उत्पादन हासिल किया। बाजार में गेंदा फूल की अच्छी मांग होने के कारण उन्हें 3 लाख रुपए से अधिक की आय प्राप्त हुई। यह उनके लिए खेती में बड़ा बदलाव साबित हुआ।

गेंदा फूल की खेती से मिली इस सफलता ने न केवल आनंदराम की आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि आसपास के किसानों को भी नई दिशा दी है। अब क्षेत्र के कई किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ नगदी फसलों और फूलों की खेती की ओर रुचि दिखा रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यदि किसानों को सही मार्गदर्शन और बाजार उपलब्ध हो, तो खेती लाभ का बड़ा माध्यम बन सकती है।

उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिले में फूलों की खेती तेजी से बढ़ रही है और आने वाले समय में यह किसानों के लिए आय का मजबूत स्रोत बन सकती है। विभाग द्वारा किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और योजनाओं का लाभ देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। आनंदराम सिदार की सफलता इस बात का उदाहरण है कि बदलती खेती और नई सोच ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे सकती है।

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Kanha Shastri

Kanha Shastri