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जांजगीर-चांपा में उग्र हुआ जनआक्रोश: विधायक ब्यास कश्यप अन्न-जल त्यागकर सत्याग्रह पर बैठे, बैरिकेड तोड़ कलेक्टर कार्यालय पहुंचा प्रदर्शन

जांजगीर चांपा । जांजगीर-चांपा जिले में सोमवार को उस समय राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई, जब क्षेत्रीय विधायक ब्यास कश्यप अपने समर्थकों के साथ बड़े आंदोलन पर उतर आए। विधायक निधि, DMF (जिला खनिज न्यास) और CSR मद की राशि रोके जाने के आरोप को लेकर शुरू हुआ विरोध देखते ही देखते उग्र प्रदर्शन में बदल गया। भारी संख्या में पहुंचे समर्थकों ने प्रशासन द्वारा लगाए गए बैरिकेड तोड़ दिए और कलेक्टर कार्यालय गेट तक पहुंचकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। पूरे घटनाक्रम के दौरान जिला मुख्यालय में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही तथा पुलिस और प्रशासन को अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ी।

विधायक ब्यास कश्यप ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि क्षेत्र के विकास कार्यों को जानबूझकर बाधित किया जा रहा है। उनका कहना है कि विधायक निधि से स्वीकृत कई योजनाएं महीनों से लंबित हैं, जबकि DMF और CSR की राशि भी समय पर जारी नहीं की जा रही। इसके कारण सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, सामुदायिक भवन और ग्रामीण अधोसंरचना से जुड़े अनेक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। विधायक ने आरोप लगाया कि जनता की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है और जनप्रतिनिधियों की बातों को महत्व नहीं दिया जा रहा।

आंदोलन के दौरान विधायक ब्यास कश्यप ने अन्न-जल त्यागकर सत्याग्रह शुरू करने की घोषणा की। धरना स्थल पर उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्तिगत हित की नहीं बल्कि क्षेत्र की जनता के अधिकारों और विकास के लिए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक लंबित राशि जारी नहीं होती और विकास कार्यों को स्वीकृति नहीं मिलती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। विधायक के इस फैसले के बाद समर्थकों में भी आक्रोश और अधिक बढ़ता दिखाई दिया।

धरना प्रदर्शन को राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। अकलतरा और जैजैपुर के विधायक भी आंदोलन स्थल पहुंचे और ब्यास कश्यप के समर्थन में खुलकर सामने आए। उन्होंने कहा कि यदि जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों को ही विकास कार्यों के लिए संघर्ष करना पड़े, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। विपक्षी नेताओं ने इसे “जनता के अधिकारों की लड़ाई” बताते हुए सरकार और प्रशासन पर क्षेत्रीय विकास की उपेक्षा करने का आरोप लगाया।

प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद रहे। प्रशासन द्वारा लगाए गए बैरिकेड को हटाने और आगे बढ़ने की कोशिश के कारण कुछ समय के लिए स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हालांकि पुलिस बल ने मोर्चा संभालते हुए हालात को नियंत्रित किया। कलेक्टर कार्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।

इस पूरे घटनाक्रम ने जिले की राजनीति को गरमा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आंदोलन आने वाले दिनों में बड़ा जनआंदोलन का रूप ले सकता है, क्योंकि इसमें विकास कार्यों और क्षेत्रीय अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से जुड़ा हुआ है। वहीं आम लोगों के बीच भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि यदि जनप्रतिनिधियों को ही निधियों और योजनाओं के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है, तो प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अब सबकी निगाहें प्रशासन और सरकार की अगली रणनीति पर टिकी हुई हैं। यदि शीघ्र समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन और व्यापक होने की संभावना जताई जा रही है।

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Kanha Shastri

Kanha Shastri