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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा प्रशासनिक सुधार: गर्मी में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुनवाई, वर्क फ्रॉम होम और वाहन पूलिंग व्यवस्था लागू

बिलासपुर । छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने न्यायिक कार्यप्रणाली में तकनीकी और प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव डालने वाला निर्णय लिया है। यह कदम देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था Supreme Court of India के हालिया निर्देशों और बदलते कार्य-संस्कृति ढांचे के अनुरूप माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य न्याय व्यवस्था को अधिक आधुनिक, सुलभ और संसाधन-संवेदनशील बनाना है।

इस नई व्यवस्था के तहत Chhattisgarh High Court ने स्पष्ट किया है कि ग्रीष्मकालीन अवकाश अवधि में अदालतों की सुनवाई अब डिजिटल माध्यम यानी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी की जाएगी। इस निर्णय का उद्देश्य भीषण गर्मी में वकीलों, पक्षकारों और न्यायालयीन कर्मचारियों को अनावश्यक यात्रा और शारीरिक असुविधा से राहत देना है, साथ ही न्यायिक प्रक्रिया को निर्बाध बनाए रखना है।

न्यायालय प्रशासन के अनुसार, जहां वर्चुअल सुनवाई की सुविधा उपलब्ध होगी, वहां पक्षकारों और अधिवक्ताओं को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की बाध्यता नहीं होगी। हालांकि, यह प्रावधान लचीला रखा गया है, ताकि यदि किसी मामले में आवश्यकता हो या तकनीकी कारणों से वर्चुअल उपस्थिति संभव न हो, तो संबंधित पक्ष को भौतिक रूप से उपस्थित होने की अनुमति दी जा सके। इसके साथ ही न्यायालय स्वयं भी आवश्यकतानुसार फिजिकल सुनवाई का आदेश दे सकता है।

प्रशासनिक सुधारों के तहत एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है, जिसके अनुसार हाईकोर्ट और जिला न्यायालयों के कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन तक वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी जा सकती है। यह व्यवस्था रोटेशन प्रणाली पर आधारित होगी, जिसके तहत कम से कम 50 प्रतिशत कर्मचारी नियमित रूप से कार्यालय में उपस्थित रहेंगे, ताकि न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

घर से कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे अपने मोबाइल फोन और सरकारी संचार माध्यमों के जरिए सदैव उपलब्ध रहें, जिससे किसी भी आपात स्थिति या कार्य संबंधी आवश्यकता पर तुरंत संपर्क स्थापित किया जा सके।

संसाधन प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए न्यायालय प्रशासन ने ईंधन बचत और वाहनों के बेहतर उपयोग के लिए व्हीकल पूलिंग व्यवस्था को बढ़ावा देने का प्रस्ताव भी रखा है। इसके अंतर्गत न्यायिक अधिकारियों, रजिस्ट्री अफसरों और मंत्रालयीन कर्मचारियों के लिए साझा वाहन प्रणाली लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं। यहां तक कि न्यायाधीशों से भी आपसी सहयोग के आधार पर कार-पूलिंग अपनाने का आग्रह किया गया है।

न्यायालय ने यह भी निर्देश दिए हैं कि इन सभी व्यवस्थाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए रजिस्ट्री विभाग तकनीकी ढांचे को मजबूत करे, विशेषकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्रणाली और डिजिटल संचार माध्यमों को पूरी तरह सक्षम और निर्बाध रखा जाए, ताकि न्यायिक कार्य में किसी प्रकार की रुकावट न आए।

हाईकोर्ट प्रशासन का मानना है कि यह पूरी पहल केवल प्रशासनिक सुविधा नहीं, बल्कि एक व्यापक संस्थागत सुधार है, जिसका उद्देश्य न्याय प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तकनीकी रूप से सक्षम और जनता के लिए सुलभ बनाना है। इसके साथ ही यह कदम पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा बचत और सरकारी संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की दिशा में भी एक सकारात्मक प्रयास है।

कुल मिलाकर यह निर्णय न्यायिक व्यवस्था में एक ऐसे परिवर्तन का संकेत देता है, जिसमें परंपरागत कार्यशैली और आधुनिक तकनीक का संतुलित समावेश किया गया है। आने वाले समय में यह मॉडल अन्य राज्यों के न्यायालयों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बन सकता है।

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Kanha Shastri

Kanha Shastri