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गौधामों की बदहाली पर हाई कोर्ट सख्त

“कागजों में नहीं, जमीन पर दिखे गौसेवा” सड़कों पर आवारा मवेशियों से मानव जीवन खतरे में नहीं पड़ना चाहिए

बिलासपुर । छत्तीसगढ़ में गौधामों की वास्तविक स्थिति को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। बिलासपुर हाई कोर्ट ने लाखासार गौधाम की अव्यवस्थाओं पर गंभीर चिंता जताते हुए स्पष्ट कहा है कि गौधाम केवल सरकारी फाइलों और योजनाओं तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि वहां पशुओं के लिए मानवीय और सुरक्षित व्यवस्था भी सुनिश्चित होनी चाहिए। अदालत ने इस मामले में संबंधित विभाग के सचिव से जवाब मांगा है।  

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बिलासपुर जिले के ग्राम लाखासार स्थित 25 एकड़ में फैले गौधाम की स्थिति सरकारी दावों से बिल्कुल अलग दिखाई दी। यहां मात्र 10×26 फीट के छोटे कमरे में 205 से अधिक गायों को ठूंसकर रखा गया है। हालत इतनी खराब है कि पशुओं को बैठने तक की पर्याप्त जगह नहीं मिल रही। पशु चिकित्सकों के मुताबिक एक गाय के लिए कम से कम 30 से 40 वर्गफुट ढंका क्षेत्र आवश्यक होता है, लेकिन यहां क्षमता से कई गुना अधिक मवेशियों को रखने से दम घुटने और संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है।  

हाई कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि सड़कों पर घूम रहे आवारा मवेशी केवल यातायात व्यवस्था ही नहीं बिगाड़ते, बल्कि आम लोगों के जीवन के लिए भी खतरा बन रहे हैं। अदालत की इस सख्त टिप्पणी ने प्रदेश में गौसंरक्षण योजनाओं की जमीनी हकीकत पर गंभीर बहस छेड़ दी है।  

प्रदेश में करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए गौठानों और गौधामों की स्थिति पर अब प्रशासनिक जवाबदेही तय होने की उम्मीद बढ़ गई है। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि गौसेवा के नाम पर योजनाएं चल रही हैं, तो फिर पशुओं को अमानवीय परिस्थितियों में क्यों रखा जा रहा है। अदालत की सख्ती के बाद अब सबकी नजर सरकार और संबंधित विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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Kanha Shastri

Kanha Shastri