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गारे-पलमा जनसुनवाई स्थगित: विरोध और राजनीतिक दबाव के बीच प्रशासन का फैसला

रायगढ़। गारे-पलमा कोयला खदान परियोजना को लेकर प्रस्तावित 19 मई की जनसुनवाई को प्रशासन द्वारा स्थगित कर दिया गया है। यह निर्णय क्षेत्र में लगातार बढ़ते विरोध, ग्रामीणों के आक्रोश और राजनीतिक दबाव के बीच लिया गया, जिससे स्थानीय स्तर पर नई बहस शुरू हो गई है।

जानकारी के अनुसार, परियोजना को लेकर लंबे समय से प्रभावित गांवों में असंतोष का माहौल था। ग्रामीणों, किसानों, आदिवासी परिवारों और भूमिहीन मजदूरों ने रोजगार, पुनर्वास, मुआवजा और आजीविका सुरक्षा को लेकर स्पष्ट नीति की मांग उठाई थी। इसी बीच कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर सक्रिय रुख अपनाते हुए मोर्चा खोल दिया था।

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने 17 मई को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर ग्रामीणों से संवाद किया और उनकी समस्याओं को गंभीर बताया। पार्टी नेताओं का आरोप था कि अडानी समूह और एसईसीएल से जुड़े लोगों द्वारा जनसुनवाई के समर्थन में ग्रामीणों को प्रलोभन देने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी।

इसके बाद 18 मई को कांग्रेस प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मुलाकात कर ग्रामीणों की समस्याओं और कथित अनियमितताओं को लेकर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मांग की कि जब तक प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और रोजगार की ठोस व्यवस्था नहीं होती, तब तक जनसुनवाई आगे न बढ़ाई जाए।

लगातार विरोध और राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद पर्यावरण विभाग ने 19 मई को प्रस्तावित जनसुनवाई को स्थगित करने का निर्णय लिया। इस फैसले के बाद कांग्रेस और ग्रामीण संगठनों ने इसे अपनी “जीत” बताया है, वहीं प्रशासनिक स्तर पर इसे शांति व्यवस्था और सभी पक्षों की सहमति से जुड़ा कदम माना जा रहा है।

फिलहाल इस पूरे मामले पर क्षेत्र में चर्चाएं तेज हैं और आगे जनसुनवाई की नई तिथि को लेकर सभी की निगाहें प्रशासनिक निर्णय पर टिकी हुई हैं।

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Tarendra Dansena

Tarendra Dansena