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खरसिया हिरासत कांड: युवक की मौत से मचा बवाल, कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल, दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के खरसिया थाना क्षेत्र के परासकोल गांव में हुए हत्याकांड की जांच के दौरान हिरासत में लिए गए ग्रामीण रमेश चौहान की इलाज के दौरान मौत हो जाने से मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है, वहीं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, परासकोल गांव में हुए एक हत्याकांड की जांच के सिलसिले में पुलिस ने संदेह के आधार पर रमेश चौहान को पूछताछ के लिए खरसिया थाना बुलाया था। परिजनों का कहना है कि रमेश चौहान पूरी तरह स्वस्थ अवस्था में थाने गया था, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। हालत गंभीर होने पर उसे पहले खरसिया अस्पताल ले जाया गया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया। यहां उसकी हालत और बिगड़ने पर उसे आगे इलाज के लिए रायपुर भेजा गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

परिजनों ने आरोप लगाया है कि हिरासत में कथित मारपीट और पुलिसिया दबाव के कारण रमेश चौहान की हालत बिगड़ी थी। बताया जा रहा है कि रायगढ़ में कराए गए सीटी स्कैन में उसके सिर में खून का थक्का जमने की पुष्टि हुई थी, जिससे उसकी स्थिति लगातार गंभीर होती चली गई।

इस घटना को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के अध्यक्ष नागेन्द्र नेगी और जिला प्रवक्ता तारेन्द्र डनसेना ने संयुक्त बयान जारी कर इसे अमानवीय और असंवैधानिक बताया है। उनका कहना है कि यह घटना वर्दी की आड़ में सत्ता के दुरुपयोग का ज्वलंत उदाहरण है और इससे कानून व्यवस्था तथा मानवाधिकारों पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।

जिला कांग्रेस प्रवक्ता तारेन्द्र डनसेना ने पुलिसिया व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब इस हत्याकांड में पुलिस पहले ही आरोपी राहुल यादव को गिरफ्तार कर चुकी थी और उसने ₹3000 के विवाद में हत्या करना स्वीकार भी कर लिया था, तो फिर रमेश चौहान को किस आधार पर इतनी कठोर पूछताछ का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति स्वस्थ हालत में थाने गया था, उसकी हालत अचानक इतनी गंभीर कैसे हो गई-यह अपने आप में बड़ा सवाल है।

वहीं जिला अध्यक्ष नागेन्द्र नेगी ने कहा कि यह घटना मानवाधिकारों के खुले उल्लंघन का प्रतीक है और इसकी निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की न्यायिक या किसी उच्चस्तरीय स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को सजा मिल सके।

कांग्रेस नेताओं ने राज्य सरकार से मांग की है कि पीड़ित परिवार को तत्काल पर्याप्त आर्थिक सहायता और सम्मानजनक मुआवजा दिया जाए। साथ ही पीड़ित के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाए और संबंधित पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए, ताकि वे बिना किसी दबाव के अपनी बात रख सकें।

कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में जल्द और सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो पार्टी जनआंदोलन शुरू करेगी और न्याय की मांग को सड़क से लेकर सदन तक उठाएगी।

युवक की मौत के बाद खरसिया और आसपास के क्षेत्रों में लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। यह मामला अब केवल एक व्यक्ति की मौत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली, मानवाधिकारों और कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल बनकर उभर रहा है।

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Kanha Shastri

Kanha Shastri