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खरसिया में जल संकट पर कांग्रेस का हल्ला बोल

नहरों में पानी छोड़ने की मांग, प्रशासन को 7 दिन का अल्टीमेटम

खरसिया, 23 फरवरी 2026। क्षेत्र में गहराते जल संकट और दम तोड़ती रबी फसलों को बचाने की मांग को लेकर कांग्रेस ने सोमवार को प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पूर्व मंत्री व विधायक उमेश पटेल के मार्गदर्शन में मदनपुर स्थित कांग्रेस कार्यालय से लगभग 250 कार्यकर्ता और किसान पदयात्रा करते हुए तहसील कार्यालय पहुंचे।

एसडीएम प्रवीण तिवारी अनुपस्थिति में तहसीलदार मोनल साय को ज्ञापन सौंपा गया। कांग्रेस ने प्रशासन को 7 दिन के भीतर मांगें पूरी करने का अल्टीमेटम दिया है, अन्यथा विधानसभा स्तर पर बड़े जन आंदोलन की चेतावनी दी है।

भूजल स्तर गिरने से बढ़ी चिंता

खरसिया क्षेत्र में हर वर्ष गर्मी के मौसम में भूजल स्तर गिरने की समस्या सामने आती है। इस बार स्थिति अधिक गंभीर बताई जा रही है। ग्रामीण और शहरी इलाकों में नदियां, नाले, तालाब, डभरियां, कुएं, हैंडपंप और बोरवेल का जलस्तर काफी नीचे चला गया है।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि समय रहते पानी की व्यवस्था नहीं की गई तो पेयजल संकट और गहरा सकता है।

रबी फसलें संकट में

किसानों के अनुसार, रबी फसलें अंतिम चरण में हैं और सिंचाई के अभाव में सूखने की कगार पर पहुंच चुकी हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि कोरबा नहर और आंडपथरा डैम से तत्काल पानी छोड़ा जाए, ताकि फसलों को बचाया जा सके और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान से राहत मिले।

तहसील कार्यालय में नारेबाजी

मदनपुर से निकली पदयात्रा जब तहसील कार्यालय पहुंची, तो सुरक्षा कारणों से मुख्य गेट बंद कर दिया गया। इससे प्रदर्शनकारी आक्रोशित हो गए और गेट पर ही नारेबाजी शुरू कर दी।

‘नहरों में पानी छोड़ो’, ‘किसानों को पानी दो’ जैसे नारों से माहौल गूंज उठा। भारी दबाव के बाद पुलिस ने गेट खोला और प्रतिनिधिमंडल को भीतर जाने दिया।

इस दौरान एसडीओपी प्रभात पटेल के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी राजेश जांगिड और उनकी टीम मौके पर मौजूद रही।

प्रशासन का आश्वासन, कांग्रेस की चेतावनी

तहसीलदार मोनल साय ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए भरोसा दिलाया कि समस्या से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।

हालांकि कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि 7 दिनों के भीतर नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया और ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो किसानों के साथ मिलकर बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा।

अब सबकी नजर प्रशासनिक कार्रवाई और तय समयसीमा पर टिकी हुई है।

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Tarendra Dansena

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