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कोरबा बालिका गृह की बिंदु बनी दुल्हन, विद्युत कर्मी अनिल ने थामा हाथ… अब तक 6 अनाथ बेटियों की हो चुकी शादी

छत्तीसगढ़ के कोरबा से एक भावुक और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। बालिका गृह में पली-बढ़ी अनाथ बिंदु का विवाह छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी के कर्मचारी अनिल के साथ वैदिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ।

बालिका गृह परिसर में गूंजे शहनाई के सुर

25 फरवरी को बालिका गृह परिसर में ही मंडप सजा, मंत्रोच्चार हुआ और अग्नि के सात फेरे लेकर बिंदु ने नए जीवन की शुरुआत की। विवाह से पहले सगाई और मेहंदी की रस्में भी पूरे उत्साह के साथ निभाई गईं।

अनिल ने खुद चुना जीवनसाथी

अनिल, जो छतीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण निगम में कार्यरत हैं, ने स्वयं बिंदु को जीवनसंगिनी के रूप में चुना। अनिल के माता-पिता नहीं हैं और वे अपने रिश्तेदारों के साथ रहते हैं। उन्होंने एक अनाथ बेटी का हाथ थामकर समाज के सामने संवेदनशील उदाहरण पेश किया।

अब तक 6 बेटियों को मिला नया घर

बालिका गृह की संचालिका रुकमणी नायर ने बताया कि यह उनके केंद्र की छठवीं बेटी है, जिसकी शादी संपन्न हुई है। यहां कोरबा, चांपा, जांजगीर और सक्ती जिलों की उपेक्षित, शोषित और अनाथ बालिकाओं को आश्रय दिया जाता है।

50 बेटियों को मिलता है सहारा

इस केंद्र में करीब 50 बालिकाएं रहती हैं, जिन्हें 18 वर्ष की आयु तक शिक्षा, आवास और भोजन की सुविधा दी जाती है। कई बेटियां यहां से पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बनीं और अच्छी नौकरियों में कार्यरत हैं।

प्लास्टिक मुक्त विवाह का संदेश

इस विवाह समारोह को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त रखा गया। आयोजकों ने प्लास्टिक का कोई भी सामान उपयोग नहीं किया, जिससे पर्यावरण संरक्षण का मजबूत संदेश समाज तक पहुंचे।

यह विवाह सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि संवेदना, जिम्मेदारी और सामाजिक बदलाव की एक खूबसूरत मिसाल बन गया।

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Tarendra Dansena

Tarendra Dansena