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कुनकुनी रेलवे पुल: विकास की आड़ में बना मौत का गड्ढा

बरसात में तालाब, बाकी दिनों में हादसों का ट्रैप आखिर जिम्मेदार कौन?

खरसिया। रायगढ़ जिले अंतर्गत खरसिया नेशनल हाईवे पर स्थित ग्राम कुनकुनी का रेलवे पुल अब विकास नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का प्रतीक बन चुका है। यह वह स्थान है जहाँ हर मौसम में खतरा खड़ा रहता है बरसात में जलमग्न सड़क और सामान्य दिनों में तेज रफ्तार के बीच जानलेवा ढलान।

यह समस्या प्राकृतिक नहीं है। यह किसी “आदि काल” की देन नहीं, बल्कि कुछ निर्णयों की चूक और प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम है।

🔹चौड़ीकरण या चूक?

लगभग पाँच वर्ष पूर्व हाईवे चौड़ीकरण के दौरान पहाड़ काटकर सड़क का स्तर बदला गया। लेकिन जिस स्थान पर निजी पावर प्लांट की रेलवे लाइन सड़क को पार करती है, वहाँ पुल की ऊँचाई बढ़ाने के बजाय सड़क को ही नीचे कर दिया गया।

परिणाम आज सड़क एक गहरे कटोरे की तरह बन गई है, जहाँ पानी रुकता है, वाहन फंसते हैं और दुर्घटनाएँ आम हो चुकी हैं।

स्थानीय नागरिक सवाल पूछ रहे हैं-

क्या पुल को ऊँचा बनाना संभव नहीं था?

या फिर किसी निजी सुविधा को प्राथमिकता दी गई?

🔹बरसात में बन जाता है मौत का तालाब

जैसे ही बारिश शुरू होती है, रेलवे लाइन के नीचे का हिस्सा पानी से लबालब भर जाता है। जलनिकासी की समुचित व्यवस्था न होने से घंटों तक पानी जमा रहता है।दोपहिया वाहन बंद पड़ जाते हैं चारपहिया वाहन आधे डूब जाते हैं एम्बुलेंस और स्कूली वाहन तक प्रभावित होते हैं लोग मजबूरन लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाते हैं, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी होती है।

🔹नाली बनी शोपीस, सफाई शून्य

सड़क किनारे बनाई गई नालियाँ अधूरी और अव्यवस्थित हैं। निर्माण के समय छोड़ा गया मलबा अब भी जमा है। पानी की निकासी बाधित है, और जिम्मेदार ठेकेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखती। यह स्थिति केवल तकनीकी नहीं, प्रशासनिक संवेदनहीनता को भी दर्शाती है।

🔹बाकी दिनों में दुर्घटनाओं का जाल

बरसात छोड़ भी दें, तो सामान्य दिनों में भी यह स्थान सुरक्षित नहीं। अचानक नीचे जाती सड़क, पुल के नीचे सीमित ऊँचाई और अपर्याप्त चेतावनी संकेत इन सबके कारण वाहन चालक असंतुलित हो जाते हैं। रात्रि में यह खतरा और बढ़ जाता है। स्थानीय लोग बताते हैं कि छोटे-बड़े कई हादसे हो चुके हैं, पर हर बार मरहम-पट्टी कर मामला शांत कर दिया जाता है।

🔹विकास बनाम जनसुरक्षा

सवाल केवल एक पुल का नहीं, बल्कि विकास की प्राथमिकताओं का है। क्या सड़क निर्माण केवल कागजों और उद्घाटनों तक सीमित रहेगा? क्या आम जनता की सुरक्षा से बड़ा कोई हित हो सकता है?

🔹जनता की स्पष्ट मांग

रेलवे पुल की ऊँचाई का पुनर्मूल्यांकन सड़क स्तर का वैज्ञानिक पुनर्निर्माण जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था उच्च स्तरीय जांच और जवाबदेही तय हो रात्रिकालीन प्रकाश और चेतावनी संकेत अनिवार्य

कुनकुनी रेलवे पुल अब एक चेतावनी है-यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो अगली दुर्घटना केवल समाचार नहीं, किसी परिवार की त्रासदी होगी। अब निर्णय प्रशासन को लेना है सुधार या फिर अगली घटना का इंतज़ार?

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Tarendra Dansena

Tarendra Dansena