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कबीरधाम में बायसन पर क्रूर हमला: 5 शिकारी गिरफ्तार, धनुष-बाण बरामद रेस्क्यू और सर्जरी के बाद सुरक्षित जंगल में छोड़ा गया 🚨

कबीर धाम । छत्तीसगढ़ के कबीर धाम जिले में वन्यजीव संरक्षण को लेकर वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बायसन (भारतीय गौर) पर तीर से हमला करने वाले पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस घटना ने क्षेत्र में न केवल सनसनी फैलाई, बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

अंधेरे का फायदा उठाकर किया गया हमला

घटना सरहापथरा गांव की है, जहां जंगल से भटककर आबादी के करीब पहुंचे एक वयस्क भारतीय गौर पर शिकारियों ने सुनियोजित तरीके से हमला किया। रात के अंधेरे में आरोपियों ने धनुष-बाण से बायसन को निशाना बनाया। हमले के बाद उसके शरीर में तीन तीर धंसे पाए गए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया और दर्द से तड़पता रहा।

वन विभाग की त्वरित कार्रवाई, रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू

घटना की जानकारी मिलते ही वन परिक्षेत्र पंडरिया (पूर्व) के सीमावर्ती क्षेत्र में वन विभाग हरकत में आया। निखिल अग्रवाल के निर्देशन में वन विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम की संयुक्त टीम ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

बताया गया कि पिछले कुछ दिनों से इस बायसन के क्षेत्र में घूमने की सूचना मिल रही थी, जिस पर विभाग पहले से नजर बनाए हुए था।

विशेषज्ञों की टीम ने किया जीवनरक्षक उपचार

रेस्क्यू के दौरान स्थानीय वन्यजीव विशेषज्ञ डॉक्टर जड़िया ने बायसन को निश्चेत कर उसके शरीर से एक तीर निकाला और प्राथमिक उपचार किया। हालांकि अगले दिन स्थिति चिंताजनक हो गई, जब यह सामने आया कि बायसन अपने एक पैर का सही उपयोग नहीं कर पा रहा है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिलासपुर से विशेषज्ञ टीम बुलाई गई। डॉक्टर चंदन और उनकी टीम ने गहन जांच के बाद पाया कि बायसन के पैर के भीतर दो और तीर गहराई तक धंसे हुए हैं, जो बाहर से दिखाई नहीं दे रहे थे।

इसके बाद दोबारा निश्चेत कर जटिल सर्जरी की गई, जिसमें दोनों तीर सफलतापूर्वक निकाल लिए गए। यह ऑपरेशन बेहद संवेदनशील था, लेकिन विशेषज्ञों की तत्परता और कुशलता से बायसन की जान बचा ली गई।

स्वस्थ होने के बाद प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया

इलाज और निगरानी के बाद बायसन पूरी तरह स्वस्थ हो गया। वन विभाग ने सावधानीपूर्वक उसे उसके प्राकृतिक जंगल में छोड़ दिया, जिससे वह फिर से सामान्य जीवन जी सके।

डॉग स्क्वाड और मुखबिर तंत्र से आरोपियों तक पहुंच

इधर, वन विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अपने मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया और डॉग स्क्वाड की मदद से आरोपियों का पता लगाया। सरहापथरा गांव में दबिश देकर पंडरू, चैतुराम, शिवा, पताल सिंह और सुखराम को गिरफ्तार किया गया।

आरोपियों के पास से शिकार में इस्तेमाल धनुष-बाण भी बरामद किए गए हैं। सभी के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 और लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। 27 मार्च को उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

वन विभाग का सख्त संदेश

इस पूरी कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वन्यजीवों के खिलाफ किसी भी प्रकार की क्रूरता या अवैध शिकार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वन विभाग और वन विकास निगम की संयुक्त पहल ने जहां एक बेजुबान जानवर की जान बचाई, वहीं शिकारियों के खिलाफ कड़ा संदेश भी दिया है।यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि जंगल केवल संसाधन नहीं, बल्कि असंख्य जीवों का घर हैं और उनकी रक्षा करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

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Tarendra Dansena

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