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ऑनलाइन फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स पर बढ़ता दबाव: ईंधन महंगाई से ऑर्डर महंगे होने की आशंका

रायपुर । देश में पेट्रोल-डीजल की हालिया कीमत वृद्धि और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दामों में उतार-चढ़ाव का असर अब डिजिटल उपभोक्ता सेवाओं पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। ऑनलाइन फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बढ़ती लॉजिस्टिक लागत के कारण आने वाले समय में ग्राहकों को अधिक भुगतान करना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगभग 3–4% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उछाल और भू-राजनीतिक तनावों से जुड़ी हुई है। चूंकि डिलीवरी इकोसिस्टम का बड़ा हिस्सा दोपहिया वाहनों और ईंधन आधारित परिवहन पर निर्भर है, इसलिए इसका सीधा असर प्रति ऑर्डर लागत पर पड़ रहा है।

ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियां जैसे Swiggy और Eternal (जोमैटो की पैरेंट कंपनी) तथा क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसे Blinkit और Zepto बड़े पैमाने पर छोटे डिलीवरी ऑर्डर और तेज लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर काम करते हैं। इन मॉडलों में प्रति ऑर्डर लागत पहले से ही सीमित मार्जिन के साथ नियंत्रित की जाती है, जिसमें ईंधन का हिस्सा लगभग 20% तक माना जाता है।

वर्तमान अनुमानों के अनुसार, क्विक कॉमर्स में प्रति ऑर्डर औसत खर्च ₹35 से ₹50 के बीच और फूड डिलीवरी में ₹55 से ₹60 प्रति ऑर्डर के आसपास आता है। कंपनियों का औसत मिश्रित लागत स्तर लगभग ₹45 से ₹55 प्रति ऑर्डर माना जाता है। ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के चलते प्रति ऑर्डर लगभग 40–50 पैसे का अतिरिक्त दबाव उत्पन्न हुआ है।

हालांकि यह वृद्धि देखने में छोटी लगती है, लेकिन प्रतिदिन करोड़ों ऑर्डर प्रोसेस करने वाले प्लेटफॉर्म के लिए यह कुल मिलाकर बड़ा वित्तीय बोझ बन सकता है। यदि आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतें और बढ़कर ₹10 प्रति लीटर तक ऊपर जाती हैं, तो प्रति ऑर्डर लागत में यह दबाव ₹1 से ₹1.20 तक पहुंच सकता है।

विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी स्थिति में कंपनियों के पास दो ही विकल्प रहेंगे—या तो इस अतिरिक्त लागत को स्वयं वहन करें, जिससे उनके लाभ मार्जिन पर दबाव बढ़ेगा, या फिर इसे उपभोक्ताओं पर डालें, जिससे डिलीवरी चार्ज, प्लेटफॉर्म फीस और कुल ऑर्डर लागत में वृद्धि संभव है।

पहले से ही इन कंपनियों ने पिछले कुछ वर्षों में प्लेटफॉर्म फीस और सर्विस चार्ज में लगातार बढ़ोतरी की है, जिससे उपभोक्ता खर्च धीरे-धीरे बढ़ता गया है। ईंधन लागत बढ़ने का यह नया दबाव इस प्रवृत्ति को और तेज कर सकता है।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इस प्रभाव का सबसे अधिक असर क्विक कॉमर्स सेक्टर पर पड़ सकता है, जहां अभी भी कई कंपनियां लाभप्रदता के लक्ष्य तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाई हैं। अपेक्षाकृत बड़े स्केल और विविध राजस्व स्रोतों वाली कंपनियां इस दबाव को कुछ हद तक संतुलित कर सकती हैं।

कुल मिलाकर यह स्थिति स्पष्ट संकेत देती है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में बदलाव अब सीधे आम उपभोक्ता की डिजिटल सेवाओं की कीमतों को प्रभावित कर रहा है, जिससे आने वाले समय में ऑनलाइन डिलीवरी और अधिक महंगी होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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Kanha Shastri

Kanha Shastri